चंडीगढ़ साइबर सेल ने ऑपरेशन म्यूल हंट के तहत एक संगठित साइबर ठगी नेटवर्क के 9 आरोपी गिरफ्तार। चंडीगढ़ पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी।

चंडीगढ़ साइबर सेल ने ऑपरेशन म्यूल हंट के तहत एक संगठित साइबर ठगी नेटवर्क के 9 आरोपी गिरफ्तार। चंडीगढ़ पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी।

साइबर सेल चंडीगढ़ ने 38 लाख रुपये की डिजिटल अरेस्ट ठगी के मामले को सुलझाते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह ठगी 7 जनवरी को एक दंपति से की गई थी। गिरफ्तार आरोपियों में चार पंजाब से एक चेन्नई से और एक चंडीगढ़ से।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में एसपी साइबर सेल गीतांजलि खंडेलवाल ने  बताया कि आरोपियों ने खुद को कोलाबा मुंबई पुलिस और बाद में सीबीआई अधिकारी बताकर पीड़ित को फोन किया।

पीड़ित को दो दिन तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया और फोन काटने तक नहीं दिया गया। मनी लॉन्ड्रिंग में अकाउंट इस्तेमाल होने का डर दिखाकर RTGS के जरिए 38 लाख रुपये ट्रांसफर कराए गए।

इस गेम का मास्टरमाइंड फजल उर्फ रॉकी है, जो चेन्नई से काम कर रहा था और जिसके चीन से सीधे लिंक मिले हैं। ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी के जरिए चीन भेजा जा रहा था।

लोगों से  एस पी ने अपील की कि कभी भी अपना बैंक अकाउंट किसी को न दें क्योंकि इसका फायदा उठाया जा सकता है।

*जनवरी 2026 को शाम करीब 5:50 बजे उसे अज्ञात नंबरों से कॉल आए ।कॉल करने वालों ने खुद को मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन का अधिकारी बताया।

संपत्ति जब्ती और घर से बाहर निकलने की धमकी दी।इसके बाद व्हाट्सऐप वीडियो कॉल के जरिए पुलिस वर्दी पहने व्यक्ति ने फर्जी गिरफ्तारी वारंट और दस्तावेज भेजे। फिर एक अन्य कॉल सीबीआई निदेशक नाम से आई, जिसमें आधार कार्ड के दुरुपयोग की बात कही गई।

डर और दबाव में आकर पीड़ित ने आरटीजीएस के माध्यम से 38 लाख रुपये आरोपियों द्वारा बताए गए बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए।

जांच के दौरान बैंक खातों की केवाईसी और लेन-देन का विश्लेषण किया गया। चंडीगढ़ के एक बैंक खाते से 4.50 लाख रुपये चेक के जरिए निकाले गए, जो दूसरे स्तर के फ्रॉड से जुड़े थे। यह खाता वीना रानी के नाम पर पाया गया।

 सेक्टर-32, चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया गया।इसके बाद सेक्टर-45 स्थित बुड़ैल में छापामारी कर धर्मिंदर, सुखदीप और सतनाम को गिरफ्तार किया गया।ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी (USDT) में बदलने का काम मुकेश उर्फ प्रिंस करता था। उसके बाद मुकेश उर्फ प्रिंस को गिरफ्तार किया गया

आगे की जांच में सामने आया कि पूरे नेटवर्क को चेन्नई से फजल रॉकी संचालित कर रहा था वहां से फजल रॉकी को गिरफ्तार कर लिया गया।

फजल रॉकी ने कंफर्म किया कि वह टेलीग्राम के जरिए कुछ चीनी नागरिकों के संपर्क में था। प्रत्येक ट्रांजैक्शन पर आरोपी 10% कमीशन लेते थे।सभी जब्त मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और बैंक खातों को साइबर फॉरेंसिक लैब भेजा गया है। मामले की गहन जांच जारी है।