छत्तीसगढ़ में खुलेंगी ओपन जेल, सरकार को रिपोर्ट पेश करने के निर्देश
छत्तीसगढ़ में जेल सुधार को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को ओपन जेल स्थापित करने के निर्देश दिए हैं. मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने यह आदेश जेलों में बढ़ती भीड़ और कैदियों के मानवाधिकारों के मद्देनज़र जारी किया.
अदालत ने स्वत संज्ञान लेते हुए कहा कि क्षमता से अधिक कैदियों की मौजूदगी अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन है. कोर्ट ने सुहास चकमा बनाम भारत संघ के फैसले का हवाला देते हुए राज्य में ओपन जेलों की कमी पर चिंता जताई.
हाई कोर्ट ने सरकार को चार सप्ताह में उच्च स्तरीय निगरानी समिति गठित करने का निर्देश दिया है. जो पात्र कैदियों की पहचान स्थानांतरण भूमि आवंटन और बुनियादी ढांचे के विकास की निगरानी करेगी.
महिला कैदियों के लिए भी समान सुविधाएं सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है.
कोर्ट ने मुख्य सचिव को अब तक की कार्रवाई पर हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं.
साथ ही जेलों को दंडात्मक नहीं बल्कि सुधारात्मक केंद्र बनाने के लिए प्रशिक्षण स्वास्थ्य और मजदूरी जैसी सुविधाएं लागू करने को कहा है. मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त 2026 को होगी.

