32 करोड़ शराब घोटाला: पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत, राज्य से बाहर रहने की शर्त
32 करोड़ शराब घोटाला: पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत, राज्य से बाहर रहने की शर्त
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 32 करोड़ रुपये के शराब घोटाले मामले में पूर्व आबकारी मंत्री और कोंटा विधायक कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) से जुड़े मामलों में उन्हें अंतरिम जमानत प्रदान की है। हालांकि, यह राहत कड़ी शर्तों के साथ दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, कवासी लखमा को जमानत अवधि के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहना होगा। वे केवल कोर्ट में पेशी के समय ही राज्य में प्रवेश कर सकेंगे। इसके अलावा अदालत ने उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करने, साथ ही वर्तमान पता और मोबाइल नंबर संबंधित पुलिस थाने में दर्ज कराने का निर्देश दिया है।
इस मामले में लखमा की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट हर्षवर्धन परगनिहा ने पैरवी की। उन्होंने बताया कि मंगलवार को करीब ढाई घंटे तक सुनवाई चली, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने अंतरिम जमानत का आदेश सुनाया।
15 जनवरी को हुई थी गिरफ्तारी
गौरतलब है कि ईडी ने कवासी लखमा को 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें 7 दिन की रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई। इसके बाद 21 जनवरी से 4 फरवरी तक उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया। तब से वे रायपुर सेंट्रल जेल में बंद थे। इस दौरान कांग्रेस पार्टी ने जेल में बंद लखमा के इलाज में लापरवाही का आरोप भी लगाया था।
जमानत मिलने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह फैसला साबित करता है कि संघर्ष चाहे कितना भी कठिन क्यों न हो, जीत अंततः सत्य की ही होती है।”
बजट सत्र में शामिल होने पर संशय
कोंटा विधायक कवासी लखमा को राज्य से बाहर रहने की शर्त पर जमानत दी गई है। ऐसे में वे 23 फरवरी से शुरू होने वाले विधानसभा के बजट सत्र में शामिल नहीं हो पाएंगे। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि जनप्रतिनिधि होने के नाते लखमा अदालत में विशेष अनुमति के लिए अपील कर सकते हैं। यदि कोर्ट चाहे तो उन्हें विधानसभा सत्र में शामिल होने के लिए सीमित राहत दी जा सकती है।
फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट की इस अंतरिम जमानत को शराब घोटाला मामले में लखमा के लिए बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है, जबकि जांच एजेंसियों की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

