भारतमाला परियोजना: 'विकास' की रफ़्तार या 'विनाश' का शोर? कंक्रीट का जाल और सिसकते जंगल
Bharat mala pariyojna
16,491 करोड़ का कॉरिडोर: केशकाल के फेफड़ों पर कंक्रीट की आरी, सवालों के घेरे में करोड़ों के ‘एलिफेंट
[विशेष अन्वेषणात्मक रिपोर्ट – रायपुर/कांकेर] छत्तीसगढ़ के बस्तर की ओर जाने वाली राहों पर अब धूल और बारूद की गंध है। देश की सबसे महत्वाकांक्षी ‘भारतमाला परियोजना’ के तहत रायपुर (अभनपुर) से विशाखापट्टनम तक बन रहा सिक्सलेन इकोनॉमिक कॉरिडोर अपनी चमक बिखेरने को तैयार है। सरकार का दावा है कि यह छत्तीसगढ़ की किस्मत बदल देगा, व्यापार के द्वार खोलेगा और सफर के घंटों को मिनटों में बदल देगा। लेकिन, जब यह सड़क केशकाल और कांकेर के घने जंगलों, सदियों पुराने पहाड़ों और जैव-विविधता के बीच से गुजर रही है, तो यह ‘विकास बनाम विनाश’ की एक ऐसी बहस को जन्म दे रही है, जिसका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है।

