EVM पर सवालों के बीच CM साय का कांग्रेस पर पलटवार, बोले बैलेट पेपर से भी नहीं मिली जीत
EVM पर सवालों के बीच CM साय का कांग्रेस पर पलटवार, बोले बैलेट पेपर से भी नहीं मिली जीत
चार राज्यों के विधान परिषद चुनावों को लेकर छिड़ी बहस, कर्नाटक में कांग्रेस की हार का किया जिक्र, मतदान प्रक्रिया से ज्यादा जनता के भरोसे को बताया अहम
रायपुर। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM को लेकर देश में जारी राजनीतिक बहस के बीच छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। चार राज्यों में विधान परिषद चुनावों के नतीजों का जिक्र करते हुए सीएम साय ने कहा कि कांग्रेस लगातार बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करती रही है, लेकिन बैलेट पेपर से हुए चुनावों में भी पार्टी को झटका लगा है। उन्होंने कहा कि चुनाव में जीत हासिल करने के लिए मतदान की पद्धति से ज्यादा जरूरी जनता का विश्वास और समर्थन होता है।
मुख्यमंत्री साय ने 28 अक्टूबर को दिए अपने बयान में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक की विधान परिषद सीटों के चुनावों का उल्लेख किया। उन्होंने कांग्रेस के प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव में हार के बाद मतदान प्रक्रिया पर सवाल उठाने के बजाय राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति और जनसमर्थन की समीक्षा करनी चाहिए। उनके बयान के बाद EVM और बैलेट पेपर को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है।
चार राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों पर चुनाव
उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक में विधान परिषद की कुल 28 सीटों के लिए चुनाव हुए। इन चुनावों में बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया गया। उपलब्ध शुरुआती चुनावी विवरणों के मुताबिक, कांग्रेस ने चार राज्यों में कुल 12 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। उत्तर प्रदेश में पार्टी ने कोई उम्मीदवार नहीं उतारा था।
मुख्यमंत्री साय ने इन चुनावों के परिणामों को कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर सवाल उठाने का आधार बनाया। हालांकि, शुरुआती नतीजों और बाद में सामने आई जानकारी के बीच अंतर रहा। महाराष्ट्र की एक सीट पर कांग्रेस की जीत की खबर भी सामने आई थी। इसलिए सभी 28 सीटों पर कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले अंतिम और सीटवार आधिकारिक परिणामों को देखना जरूरी है।
कर्नाटक में कांग्रेस को लगा झटका
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कर्नाटक के चुनावी नतीजों का खास तौर पर जिक्र किया। उनके मुताबिक, राज्य में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद विधान परिषद की चार सीटों पर पार्टी को जीत नहीं मिली। इन सीटों पर भाजपा और जनता दल सेक्युलर गठबंधन ने सफलता हासिल की। उपलब्ध विवरणों के अनुसार, भाजपा ने तीन सीटें जीतीं, जबकि जेडीएस को एक सीट मिली।
सीएम साय ने इस नतीजे को कांग्रेस के लिए राजनीतिक झटके के तौर पर पेश किया। उन्होंने कहा कि अगर बैलेट पेपर से हुए चुनावों में भी पार्टी को जीत नहीं मिलती है, तो उसे अपनी हार की वजहों पर विचार करना चाहिए। उनके अनुसार, चुनावी परिणामों का आकलन जनता के समर्थन, संगठन की मजबूती और चुनावी रणनीति के आधार पर किया जाना चाहिए।
हालांकि, विधान परिषद की इन सीटों के नतीजों का कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस सरकार के बहुमत पर सीधा असर नहीं पड़ता। विधान परिषद और विधानसभा के चुनावों की प्रक्रिया भी अलग-अलग हो सकती है, इसलिए दोनों के परिणामों को एक ही नजरिये से देखना उचित नहीं होगा।
कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री साय ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि चुनावी असफलताओं के बाद पार्टी मतदान प्रक्रिया पर सवाल उठाती है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि मतदाताओं का भरोसा हासिल करने में वे कहां पीछे रह गए। उनके मुताबिक, चुनाव में जीत केवल मतदान की तकनीक से तय नहीं होती, बल्कि जनता के समर्थन की भी अहम भूमिका होती है।
EVM को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल समय-समय पर सवाल उठाते रहे हैं और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी करते रहे हैं। दूसरी ओर, भाजपा के नेता चुनावी हार को मतदान प्रणाली से जोड़ने पर आपत्ति जताते हैं और इसे जनता के फैसले के रूप में देखने की बात कहते हैं।
पीएम मोदी ने भी कांग्रेस के प्रदर्शन पर कसा तंज
विधान परिषद चुनावों के नतीजों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 28 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कांग्रेस के प्रदर्शन पर टिप्पणी की थी। उन्होंने चार राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों और बैलेट पेपर से मतदान का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर राजनीतिक तंज कसा। इसके बाद EVM बनाम बैलेट पेपर की बहस ने फिर जोर पकड़ लिया।
वहीं, कांग्रेस EVM को लेकर अपनी आपत्तियां उठाती रही है और लोकसभा तथा विधानसभा चुनावों में बैलेट पेपर के इस्तेमाल की मांग करती रही है। इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक मतभेद लगातार सामने आते रहे हैं।
EVM बनाम बैलेट पेपर की बहस फिर चर्चा में
भारत में EVM और बैलेट पेपर से मतदान कराने को लेकर लंबे समय से बहस चलती रही है। विपक्ष के कुछ दल चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और सत्यापन को लेकर सवाल उठाते हैं, जबकि भाजपा के नेताओं का कहना है कि चुनाव परिणामों को मतदान तकनीक से जोड़ने के बजाय जनता के फैसले के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए।
हालांकि, विधान परिषद चुनावों में मतदान की प्रक्रिया लोकसभा और विधानसभा चुनावों से अलग हो सकती है। इसलिए इन चुनावों के नतीजों को EVM या बैलेट पेपर की विश्वसनीयता का अपने आप में निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता। किसी भी चुनाव के परिणाम और मतदान प्रक्रिया से जुड़े निष्कर्षों के लिए संबंधित चुनाव के नियमों, आधिकारिक आंकड़ों और निर्वाचन अधिकारियों की घोषणाओं को देखना जरूरी है।
छत्तीसगढ़ में भी बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी
चार राज्यों के विधान परिषद चुनावों को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की टिप्पणी ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी नई बहस छेड़ दी है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर सवाल उठाते हुए पार्टी को जनता का विश्वास हासिल करने पर ध्यान देने की सलाह दी है। दूसरी ओर, कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया से संबंधित अपनी आपत्तियां उठाती रही है।
फिलहाल EVM और बैलेट पेपर का मुद्दा भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी का विषय बना हुआ है। इस बहस में चुनावी नतीजों की अंतिम स्थिति और संबंधित सीटों के आधिकारिक परिणाम महत्वपूर्ण रहेंगे।

