छत्तीसगढ़ में बैंक खातों में बढ़ी हजारों करोड़ की रकम, महतारी वंदन से लेकर धान भुगतान तक का असर; रिपोर्ट में जमा और कर्ज के चौंकाने वाले आंकड़े

छत्तीसगढ़ में बैंक खातों में बढ़ी हजारों करोड़ की रकम, महतारी वंदन से लेकर धान भुगतान तक का असर; रिपोर्ट में जमा और कर्ज के चौंकाने वाले आंकड़े

छत्तीसगढ़ में बैंक खातों में बढ़ी हजारों करोड़ की रकम, महतारी वंदन से लेकर धान भुगतान तक का असर; रिपोर्ट में जमा और कर्ज के चौंकाने वाले आंकड़े

रायपुर। छत्तीसगढ़ में बैंकिंग गतिविधियों का दायरा लगातार बढ़ रहा है। प्रदेश में बैंक खातों में जमा राशि के साथ-साथ कर्ज वितरण में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2023 में प्रदेश के बैंकों में कुल जमा राशि 2,37,871.84 करोड़ रुपये थी, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 3,44,147.10 करोड़ रुपये हो गई। यानी तीन वर्षों में बैंक जमा में करीब 1.06 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि हुई।

इस बढ़ोतरी के पीछे लोगों की बचत की आदत, बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार, सरकारी योजनाओं के भुगतान और आर्थिक गतिविधियों जैसे कई कारक हो सकते हैं। महतारी वंदन योजना के तहत पात्र महिलाओं के खातों में पहुंचने वाली सहायता राशि, किसानों को धान की बिक्री से मिलने वाला भुगतान और केंद्र तथा राज्य सरकार की अन्य हितग्राहीमूलक योजनाएं भी बैंक खातों में लेनदेन बढ़ाने में भूमिका निभा सकती हैं। हालांकि, इन योजनाओं के कारण कुल बैंक जमा में कितनी वृद्धि हुई, इसका अलग से स्पष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

तीन वर्षों में बैंक जमा 3.44 लाख करोड़ रुपये के पार

राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के आंकड़े छत्तीसगढ़ में बैंकिंग कारोबार के विस्तार की तस्वीर पेश करते हैं। मार्च 2023 से मार्च 2026 के बीच प्रदेश में बैंकों की कुल जमा राशि लगातार बढ़ी है।

मार्च 2023 में यह राशि 2,37,871.84 करोड़ रुपये थी। मार्च 2024 में बढ़कर 2,82,949.54 करोड़ रुपये हो गई। मार्च 2025 में कुल जमा 3,10,684.30 करोड़ रुपये दर्ज की गई, जबकि मार्च 2026 तक यह बढ़कर 3,44,147.10 करोड़ रुपये पहुंच गई।

इन आंकड़ों के मुताबिक, तीन वर्षों में कुल बैंक जमा में लगभग 1,06,275 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई। यह वृद्धि बैंकिंग प्रणाली में जमा संसाधनों के बढ़ते आकार को दर्शाती है। हालांकि, केवल जमा राशि के बढ़ने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सभी परिवारों की बचत समान रूप से बढ़ी है। इसके लिए खाताधारकों, आय वर्गों और जमा के प्रकार से जुड़े अलग-अलग आंकड़ों की जरूरत होगी।

महतारी वंदन और सरकारी भुगतान की क्या है भूमिका?

छत्तीसगढ़ में बैंक खातों में रकम पहुंचने के संभावित स्रोतों में सरकारी योजनाओं के भुगतान को भी शामिल किया जा रहा है। महतारी वंदन योजना के तहत पात्र महिलाओं के बैंक खातों में आर्थिक सहायता भेजी जाती है। इसके अलावा धान खरीदी से संबंधित भुगतान, श्रमिक कल्याण योजनाओं और अन्य हितग्राहीमूलक कार्यक्रमों के जरिए भी लाभार्थियों तक राशि पहुंचती है।

केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी के माध्यम से पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजा जाता है। यदि लाभार्थी प्राप्त राशि का पूरा पैसा तत्काल खर्च नहीं करते, तो उसका कुछ हिस्सा खातों में बचा रह सकता है। इससे बैंक खातों में जमा शेष राशि प्रभावित हो सकती है।

हालांकि, सरकारी योजनाओं से खातों में भुगतान होना और राज्य की कुल बैंक जमा में बढ़ोतरी होना दो अलग-अलग बातें हैं। बैंक जमा पर वेतन, कारोबार, कृषि आय, निजी बचत, संस्थागत जमा और अन्य वित्तीय गतिविधियों का भी असर पड़ता है। इसलिए महतारी वंदन या किसी एक सरकारी योजना को जमा राशि में हुई पूरी वृद्धि का कारण बताना उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर उचित नहीं होगा।

कोरोना के बाद बचत और सुरक्षित निवेश पर ध्यान

बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े लोगों के अनुसार, कोरोना महामारी के बाद कई परिवार भविष्य की जरूरतों के लिए बचत को प्राथमिकता देने लगे हैं। बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य संबंधी खर्च, घरेलू जरूरतों और आपात परिस्थितियों के लिए पैसा सुरक्षित रखने की प्रवृत्ति बैंक खातों और सावधि जमा योजनाओं में निवेश को प्रभावित कर सकती है।

बचत खातों के साथ फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी भी उन लोगों के लिए एक विकल्प है, जो निर्धारित अवधि के लिए रकम जमा रखना चाहते हैं। हालांकि, एफडी की ब्याज दर बैंक, जमा अवधि और अन्य शर्तों के आधार पर अलग-अलग होती है। निवेश का फैसला करते समय महंगाई, जरूरत के समय पैसे की उपलब्धता और लागू शर्तों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

शेयर बाजार और दूसरे निवेश विकल्पों में उतार-चढ़ाव के बीच कुछ लोग अपेक्षाकृत कम जोखिम वाले साधनों को प्राथमिकता दे सकते हैं। लेकिन प्रदेश में बैंक जमा बढ़ने में इस कारण का कितना योगदान है, इसका सटीक आकलन उपलब्ध आंकड़ों से नहीं किया जा सकता।

ग्रामीण क्षेत्रों में भी बढ़ रहा बैंकिंग नेटवर्क

छत्तीसगढ़ में बैंकिंग सुविधाओं का विस्तार भी इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण पहलू है। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2023 में प्रदेश में बैंकों की 3,338 शाखाएं थीं। मार्च 2026 तक यह संख्या बढ़कर 3,596 हो गई।

बैंक शाखाओं के विस्तार और सरकारी भुगतान की बैंकिंग प्रणाली से जुड़ने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों, श्रमिकों, महिलाओं और छोटे कारोबारियों को बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है। बैंक खातों के जरिए सरकारी भुगतान प्राप्त करना, रकम जमा रखना और डिजिटल लेनदेन करना अब अनेक वित्तीय गतिविधियों का हिस्सा है।

हालांकि, शाखाओं की संख्या बढ़ना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि हर ग्रामीण परिवार की बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच आसान हो गई है। इसके लिए खातों की सक्रियता, बैंक मित्रों की उपलब्धता, डिजिटल सेवाओं के उपयोग और क्षेत्रवार सुविधाओं के आंकड़े भी महत्वपूर्ण हैं।

बैंक जमा के साथ कर्ज वितरण में भी बड़ी वृद्धि

छत्तीसगढ़ में बैंकिंग कारोबार का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू ऋण वितरण है। SLBC के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2023 में प्रदेश में कुल बैंक ऋण 1,71,173.57 करोड़ रुपये था। मार्च 2024 में यह बढ़कर 2,02,413.16 करोड़ रुपये और मार्च 2025 में 2,34,123.90 करोड़ रुपये हो गया। मार्च 2026 तक कुल बैंक ऋण 2,70,615.45 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

इस तरह तीन वर्षों में बैंक ऋण में करीब 99,442 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई। यह बताता है कि इस अवधि में बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से दिए गए कर्ज का कुल आकार भी बढ़ा है।

कृषि, सूक्ष्म और लघु उद्योग, आवास, वाहन, शिक्षा तथा अन्य जरूरतों के लिए बैंक ऋण उपलब्ध कराते हैं। हालांकि, कुल ऋण राशि में वृद्धि से यह स्पष्ट नहीं होता कि किस क्षेत्र को कितना कर्ज मिला या ऋण लेने वालों की संख्या में कितनी बढ़ोतरी हुई। इसके लिए क्षेत्रवार ऋण वितरण के आंकड़ों का अलग से विश्लेषण आवश्यक है।

होम लोन से लेकर वाहन और एजुकेशन लोन तक पर जोर

बैंक जमा के साथ ऋण कारोबार बढ़ाने के लिए भी सक्रिय रहते हैं। होम लोन, वाहन लोन, एजुकेशन लोन और पर्सनल लोन जैसी योजनाओं के जरिए पात्र ग्राहकों को कर्ज उपलब्ध कराया जाता है। कुछ बैंक मौजूदा ग्राहकों को उनकी पात्रता और निर्धारित शर्तों के अनुसार टॉपअप लोन की सुविधा भी देते हैं।

वित्त वर्ष 2026-27 में ऋण वितरण का दायरा कितना बढ़ेगा, इसका आकलन संबंधित अवधि के वास्तविक आंकड़ों से ही किया जा सकेगा। बैंकिंग क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों के बीच यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि ऋण की मांग किन क्षेत्रों से आती है और कर्ज का उपयोग किस प्रकार की आर्थिक गतिविधियों में हो रहा है।

74 हजार करोड़ से 1.10 लाख करोड़ का आंकड़ा, लेकिन जरूरी है स्पष्टता

कुछ आंकड़ों में वित्त वर्ष 2022-23 की जमा राशि 74,635.06 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2025-26 की जमा राशि 1,10,204.48 करोड़ रुपये बताई गई है। इन आंकड़ों के आधार पर तीन वर्षों में 35,569.42 करोड़ रुपये यानी करीब 47.66 प्रतिशत की वृद्धि निकलती है।

लेकिन इन आंकड़ों को छत्तीसगढ़ के सभी बैंकों की कुल जमा राशि मानना सही नहीं होगा, क्योंकि राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के उपलब्ध आंकड़ों में मार्च 2026 तक कुल बैंक जमा 3,44,147.10 करोड़ रुपये दर्ज है। इसलिए 74,635.06 करोड़ और 1,10,204.48 करोड़ रुपये के आंकड़े किसी विशेष श्रेणी, चयनित बैंकों या अलग बैंकिंग संकेतक से संबंधित हो सकते हैं। उनकी श्रेणी और स्रोत स्पष्ट होने के बाद ही उनका सटीक अर्थ निकाला जा सकता है।

कुल मिलाकर, उपलब्ध SLBC आंकड़े बताते हैं कि मार्च 2023 से मार्च 2026 के बीच छत्तीसगढ़ में बैंक जमा और ऋण दोनों का आकार बढ़ा है। सरकारी योजनाओं के भुगतान, बचत की प्रवृत्ति और बैंकिंग नेटवर्क का विस्तार इस बदलाव से जुड़े संभावित कारक हैं, लेकिन प्रत्येक कारक का वास्तविक योगदान निर्धारित करने के लिए अधिक विस्तृत आंकड़ों की जरूरत है।