छत्तीसगढ़ BJP में अंदरूनी हलचल तेज, मंत्रियों की शिकायतें पहुंचीं स्मृति ईरानी तक, मिशन 2028 से पहले सुधार पर जोर
छत्तीसगढ़ BJP में अंदरूनी हलचल तेज, मंत्रियों की शिकायतें पहुंचीं स्मृति ईरानी तक, मिशन 2028 से पहले सुधार पर जोर
रायपुर। छत्तीसगढ़ भाजपा में सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाने को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रदेश भाजपा प्रभारी स्मृति ईरानी के दो दिवसीय रायपुर दौरे के दौरान पार्टी नेताओं, विधायकों, सांसदों, पूर्व जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों के साथ कई दौर की बैठकें हुईं। इन बैठकों में संगठन की स्थिति, जनप्रतिनिधियों की सक्रियता और सरकारी योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाने जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई।
इस बीच, कुछ मंत्रियों की कार्यप्रणाली को लेकर शिकायतें सामने आने की खबरों ने राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पूर्व सांसदों, पूर्व विधायकों और पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने मंत्रियों के कामकाज को लेकर अपनी चिंताएं रखीं। इसके बाद 26 अक्टूबर को मंत्रियों के साथ हुई बैठक को भी अहम माना गया। हालांकि, किन मंत्रियों के खिलाफ शिकायतें की गईं और उन्हें क्या निर्देश दिए गए, इस बारे में कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
पूर्व सांसदों और विधायकों की बैठकों में उठा कामकाज का मुद्दा
स्मृति ईरानी और प्रदेश सह प्रभारी सिद्धार्थ शंभू ने 25 और 26 अक्टूबर को रायपुर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में पार्टी के विभिन्न स्तरों के नेताओं के साथ बैठकें कीं। पहले दिन संगठन के पदाधिकारियों, संभाग और जिला प्रभारियों, पूर्व सांसदों, पूर्व विधायकों तथा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ चर्चा हुई।
मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि इन बैठकों के दौरान कुछ मंत्रियों के कामकाज और संगठन के साथ उनके समन्वय को लेकर असंतोष जताया गया। नेताओं की ओर से मिले फीडबैक के जरिए प्रदेश प्रभारी ने संगठन और सरकार के बीच तालमेल की स्थिति को समझने की कोशिश की। हालांकि, शिकायतों की पूरी जानकारी और उनसे जुड़े विशिष्ट मामलों का आधिकारिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
मंत्रियों के साथ बैठक में क्या हुआ?
सोमवार, 26 अक्टूबर को स्मृति ईरानी ने विधायकों और सांसदों के साथ बैठकों के बाद राज्य मंत्रिमंडल के सदस्यों से भी चर्चा की। बैठक में सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन, जनप्रतिनिधियों की सक्रियता और पार्टी संगठन के साथ समन्वय जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
कुछ मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से कहा गया कि तीन से चार मंत्रियों को अपनी कार्यशैली में सुधार लाने और संगठन के साथ बेहतर तालमेल रखने की हिदायत दी गई। हालांकि, संबंधित मंत्रियों के नाम और उन्हें दिए गए कथित निर्देशों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे किसी मंत्री के खिलाफ औपचारिक कार्रवाई या पार्टी की घोषित चेतावनी के रूप में देखना सही नहीं होगा।
सरकार और संगठन के बीच तालमेल मजबूत करने पर जोर
बैठकों का एक प्रमुख उद्देश्य भाजपा सरकार और पार्टी संगठन के बीच समन्वय बेहतर बनाना रहा। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचे और जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं तथा आम जनता के साथ लगातार संपर्क बनाए रखें।
26 अक्टूबर को जारी रिपोर्टों के मुताबिक, स्मृति ईरानी ने जमीनी स्तर पर लोगों से सीधे जुड़ने पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि सोशल मीडिया पर सक्रियता लोगों के बीच प्रत्यक्ष संपर्क का विकल्प नहीं हो सकती। पार्टी विधायकों से अपने क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं और आम लोगों के साथ संवाद बढ़ाने की अपेक्षा की गई।
मिशन 2028 को लेकर भी बनाई जा रही रणनीति
छत्तीसगढ़ में अगला विधानसभा चुनाव वर्ष 2028 में होना है। ऐसे में भाजपा के लिए संगठन को मजबूत रखना, सरकार के कामकाज की समीक्षा करना और जनता के बीच अपनी पहुंच बढ़ाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्मृति ईरानी के दौरे के दौरान हुई बैठकों में आगामी चुनाव की तैयारियों, संगठनात्मक गतिविधियों और सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार पर भी चर्चा हुई। रिपोर्टों के अनुसार, विधायकों को दिवाली के दौरान अपने विधानसभा क्षेत्रों में स्थानीय लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ सामुदायिक भोज जैसे कार्यक्रम आयोजित करने के लिए भी कहा गया, ताकि जनसंपर्क को मजबूत किया जा सके।
दो दिनों में हुईं कई बैठकें, दिल्ली रवाना हुईं स्मृति ईरानी
स्मृति ईरानी का छत्तीसगढ़ दौरा 25 और 26 अक्टूबर को आयोजित किया गया था। इस दौरान उन्होंने प्रदेश के संगठनात्मक पदाधिकारियों, विधायकों, सांसदों, मंत्रियों और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। बैठकों में प्रदेश सह प्रभारी सिद्धार्थ शंभू भी शामिल रहे।
दौरे के बाद मंत्रियों के कामकाज को लेकर सामने आई शिकायतों और कथित हिदायतों पर राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई। हालांकि, भाजपा की ओर से किसी मंत्री के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की घोषणा नहीं की गई है। पार्टी प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने बैठकों को संगठन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इनमें पार्टी की रणनीति और आगामी कार्ययोजना पर चर्चा हुई। <Cite refs={["turn164557search7","turn164557search9"]}/>
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम सवाल यह है कि बैठकों में मिले फीडबैक के आधार पर सरकार और संगठन के बीच तालमेल सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। कुछ मंत्रियों को सुधार की नसीहत दिए जाने की खबरें सामने जरूर आई हैं, लेकिन संबंधित मंत्रियों के नाम और कथित शिकायतों का विवरण सार्वजनिक नहीं है।
ऐसे में फिलहाल इसे भाजपा के संगठनात्मक कामकाज की समीक्षा और सरकार-संगठन के बीच समन्वय बेहतर करने की कवायद के रूप में देखना उचित होगा। आने वाले समय में पार्टी की गतिविधियों और जनप्रतिनिधियों के कामकाज में होने वाले बदलावों से इस समीक्षा के प्रभाव का अंदाजा लग सकेगा।

