अब सिर्फ मकान नहीं बनाएगा छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड, सड़क, पुल और स्टेडियम भी बनाएगा, 700 करोड़ का कर्ज चुकाने के बाद नई तैयारी

अब सिर्फ मकान नहीं बनाएगा छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड, सड़क, पुल और स्टेडियम भी बनाएगा, 700 करोड़ का कर्ज चुकाने के बाद नई तैयारी

अब सिर्फ मकान नहीं बनाएगा छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड, सड़क, पुल और स्टेडियम भी बनाएगा, 700 करोड़ का कर्ज चुकाने के बाद नई तैयारी

रायपुर। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल अब केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा। प्रदेश में सड़क, पुल-पुलिया, खेल परिसर, स्टेडियम, सार्वजनिक भवन और शहरी पुनर्विकास जैसी बड़ी परियोजनाओं में भी मंडल की भागीदारी बढ़ाने की तैयारी है। आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने 27 अक्टूबर को नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में आयोजित राज्य स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण कार्यशाला में यह बात कही। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से आधुनिक तकनीक, नवाचार, बेहतर वित्तीय प्रबंधन और परिणाम आधारित कार्यसंस्कृति अपनाने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार मंडल को आर्थिक रूप से मजबूत, आत्मनिर्भर और बहुआयामी अधोसंरचना विकास संस्था बनाने की दिशा में काम कर रही है। कार्यशाला में प्रदेशभर से आए अधिकारियों और कर्मचारियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आधुनिक निर्माण तकनीक, वित्तीय प्रबंधन, संपदा प्रबंधन, टाउन प्लानिंग और सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल की जानकारी दी गई।

700 करोड़ रुपये की ऋण देनदारी समाप्त होने के बाद नई रणनीति

मंत्री ओ.पी. चौधरी ने बताया कि मंडल की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार के सहयोग से करीब 700 करोड़ रुपये की ऋण देनदारी समाप्त की गई है। इसके साथ ही वन टाइम सेटलमेंट यानी ओटीएस योजना और संपत्तियों के बेहतर विपणन के जरिए लंबे समय से नहीं बिक रहे आवासीय और व्यावसायिक परिसरों की बिक्री को गति मिली है।

उन्होंने कहा कि मंडल के पास अनुभवी अभियंताओं, तकनीकी अधिकारियों और कर्मचारियों का बड़ा समूह है। इस अनुभव का इस्तेमाल केवल मकान बनाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। मंडल को अपनी तकनीकी क्षमता बढ़ाकर सड़क, पुल, खेल परिसर, सार्वजनिक भवन और शहरी पुनर्विकास जैसे क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बनानी होगी।

मंत्री ने कहा कि मंडल को अन्य राज्यों की निविदाओं में भाग लेने के अवसर भी तलाशने चाहिए। इसके लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को परियोजना प्रबंधन, निर्माण गुणवत्ता, वित्तीय अनुशासन और आधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में अपनी दक्षता लगातार बढ़ानी होगी।

मांग के आधार पर शुरू होंगी नई आवासीय योजनाएं

ओ.पी. चौधरी ने कहा कि भविष्य में आवासीय परियोजनाएं शुरू करने से पहले वास्तविक मांग, बुकिंग, वित्तीय व्यवहार्यता और नागरिक सुविधाओं का आकलन करना जरूरी होगा। इससे ऐसी स्थिति से बचने में मदद मिलेगी, जिसमें मकान बनकर तैयार हो जाएं, लेकिन पर्याप्त खरीदार नहीं मिलने के कारण संपत्ति लंबे समय तक खाली पड़ी रहे।

उन्होंने पीपीपी मॉडल, टाउन प्लानिंग स्कीम और पुनर्विकास जैसे विकल्पों को अपनाने पर जोर दिया। इन तरीकों से निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाई जा सकती है और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करते हुए नई अधोसंरचना परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा सकता है।

अधिनियम संशोधन से बढ़ा मंडल का कार्यक्षेत्र

मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंह देव ने कहा कि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल का नाम बदलकर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल किए जाने के साथ इसकी जिम्मेदारियों और कार्यक्षेत्र का भी विस्तार हुआ है। 24 अप्रैल 2026 को राजपत्र में प्रकाशित अधिनियम संशोधन के बाद मंडल के लिए आवास निर्माण के साथ व्यापक अधोसंरचना और नगरीय विकास के क्षेत्र में काम करने के अवसर बढ़े हैं।

उन्होंने कहा कि यह बदलाव केवल नाम तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्था की कार्यशैली, जिम्मेदारियों और भविष्य की योजनाओं में परिवर्तन का अवसर भी है। इस दिशा में सफल होने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों को आधुनिक तकनीक, नवाचार और बेहतर प्रबंधन को अपनी कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाना होगा।

अध्यक्ष ने बताया कि पिछले करीब 18 महीनों में संपत्ति बिक्री, राजस्व अर्जन और नई परियोजनाओं के क्षेत्र में प्रगति हुई है। ओटीएस योजना और विपणन प्रयासों से लंबे समय से अविक्रित संपत्तियों की बिक्री को बढ़ावा मिला है। उन्होंने बकाया वसूली पर भी जोर देते हुए अधिकारियों को फील्ड स्तर पर प्रभावी प्रयास करने और शून्य बकाया के लक्ष्य की दिशा में काम करने के निर्देश दिए।

पीपीपी और टाउन प्लानिंग से विकास को मिलेगी गति

अनुराग सिंह देव ने कहा कि अधोसंरचना की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए केवल सरकारी बजट पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी, टाउन प्लानिंग स्कीम और पुनर्विकास जैसे मॉडल के जरिए नई परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा सकता है। इससे मंडल की वित्तीय क्षमता का विस्तार करने और उपलब्ध जमीन का बेहतर उपयोग करने में भी मदद मिल सकती है।

उन्होंने कहा कि मंडल का लक्ष्य प्रदेश के सभी 33 जिलों में नागरिकों को बेहतर सुविधाओं से युक्त, व्यवस्थित और सुरक्षित आवासीय परिसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम करना है। नई योजनाओं में मकानों के साथ उद्यान, बाजार, सामुदायिक सुविधाएं, पर्यावरण संरक्षण और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन जैसी सुविधाओं पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

प्रशिक्षण से अधिकारियों की तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर जोर

मंडल आयुक्त अवनीश कुमार शरण ने कहा कि बदलती तकनीक और अधोसंरचना विकास की नई जरूरतों के अनुरूप अधिकारियों तथा कर्मचारियों का नियमित क्षमता विकास जरूरी है। प्रशिक्षण कार्यशालाओं से उन्हें नई तकनीकों, प्रबंधन पद्धतियों और बेहतर कार्यप्रणाली की जानकारी मिलती है।

उन्होंने कहा कि कार्यशाला में सीखी गई तकनीकों का इस्तेमाल परियोजनाओं में किया जाना चाहिए, ताकि निर्माण गुणवत्ता, समयबद्धता, वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता को मजबूत किया जा सके। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों का उचित उपयोग प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बना सकता है।

आईआईएम, आईआईआईटी और एनआईटी के विशेषज्ञों ने दी जानकारी

कार्यशाला में आईआईएम रायपुर, आईआईआईटी नवा रायपुर और एनआईटी रायपुर के विशेषज्ञों ने सुशासन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक निर्माण तकनीकों पर अधिकारियों-कर्मचारियों का मार्गदर्शन किया।

आईआईएम रायपुर के निदेशक डॉ. संजीव पाराशर ने सुशासन और प्रभावी प्रशासनिक प्रबंधन पर विचार रखे। उन्होंने महाभारत के विभिन्न पात्रों के उदाहरणों के माध्यम से राजधर्म, कर्तव्यनिष्ठा और नेतृत्व क्षमता के महत्व को समझाया।

आईआईआईटी नवा रायपुर के प्रोफेसर डॉ. श्रीनिवास के.जी. ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उसके व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी। वहीं एनआईटी रायपुर के प्रोफेसर डॉ. जी.डी. रामटेकर ने स्ट्रक्चरल डिजाइन, आरसीसी संरचनाओं की मजबूती और आधुनिक निर्माण तकनीकों पर मार्गदर्शन दिया।

कार्यशाला में वित्तीय जोखिम प्रबंधन, संपदा प्रबंधन, परियोजना विपणन, नेतृत्व क्षमता और अन्य तकनीकी विषयों पर भी प्रशिक्षण दिया गया। इसका उद्देश्य अधिकारियों और कर्मचारियों की निर्णय क्षमता, तकनीकी दक्षता तथा कार्यकुशलता को मजबूत बनाना था।

इस अवसर पर आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, मंडल अध्यक्ष अनुराग सिंह देव, आयुक्त अवनीश कुमार शरण, अपर आयुक्त हर्ष कुमार जोशी सहित मंडल के वरिष्ठ अधिकारी, अभियंता, तकनीकी विशेषज्ञ और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

मंडल की नई कार्यदिशा के तहत आवास निर्माण के साथ व्यापक अधोसंरचना परियोजनाओं में भागीदारी बढ़ाने, खाली संपत्तियों का बेहतर उपयोग करने और आधुनिक तकनीक अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। इन योजनाओं का वास्तविक प्रभाव परियोजनाओं के चयन, वित्तीय प्रबंधन और जमीन पर उनके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।