छत्तीसगढ़ में सड़क पर नहीं दौड़ सकेंगी 170 बसें! परिवहन विभाग ने परमिट किए रद्द, GPS और पैनिक बटन नहीं लगाने वालों पर चला बड़ा एक्शन

छत्तीसगढ़ में सड़क पर नहीं दौड़ सकेंगी 170 बसें! परिवहन विभाग ने परमिट किए रद्द, GPS और पैनिक बटन नहीं लगाने वालों पर चला बड़ा एक्शन

छत्तीसगढ़ में सड़क पर नहीं दौड़ सकेंगी 170 बसें! परिवहन विभाग ने परमिट किए रद्द, GPS और पैनिक बटन नहीं लगाने वालों पर चला बड़ा एक्शन

रायपुर। छत्तीसगढ़ में यात्री बसों से सफर करने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाली 170 बसों के परमिट निरस्त कर उन्हें ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। अब ये बसें संबंधित परमिट के आधार पर प्रदेश ही नहीं, देश में भी कहीं संचालित नहीं हो सकेंगी। परिवहन विभाग ने साफ कर दिया है कि यदि परमिट निरस्त होने के बावजूद कोई बस सड़क पर चलती मिली, तो उसे जब्त करने के साथ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यह कार्रवाई बसों में अनिवार्य GPS यानी व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस और पैनिक बटन नहीं लगाने या इनके काम नहीं करने के कारण की गई है। विभाग ने जुलाई से सितंबर 2026 तक प्रदेशभर में विशेष जांच अभियान चलाया था।

412 बसों में GPS नहीं, 210 में लगा उपकरण मिला बंद

परिवहन विभाग की जांच में कई बसों में सुरक्षा उपकरणों से जुड़ी गंभीर खामियां सामने आईं। जांच के दौरान 412 बसों में GPS डिवाइस नहीं मिला, जबकि 210 बसों में GPS लगा होने के बावजूद बंद पाया गया। इसके अलावा 85 बसों के पैनिक बटन भी खराब मिले।

GPS के जरिए बस की लोकेशन और निर्धारित रूट पर उसके संचालन की निगरानी की जा सकती है। वहीं, पैनिक बटन आपात स्थिति में यात्रियों को मदद पहुंचाने के लिए महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से यह व्यवस्था जरूरी मानी जाती है।

300 बस संचालकों को मिला था नोटिस, फिर भी नहीं सुधरी व्यवस्था

परिवहन विभाग ने नियमों का पालन नहीं करने वाले बस संचालकों को पहले सुधार का मौका दिया था। शुरुआती कार्रवाई में 300 बस संचालकों को अंतिम नोटिस जारी कर 15 दिन का समय दिया गया था। इसके बाद 140 बस संचालकों ने GPS लगवाकर पोर्टल पर पंजीयन करा लिया।

वहीं, विभाग के अनुसार 170 बस संचालकों ने निर्देशों का पालन नहीं किया। इसके बाद इन बसों के परमिट निरस्त करने और उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की गई।

रायपुर से अंबिकापुर तक चला जांच अभियान

यह विशेष जांच अभियान केवल एक जिले तक सीमित नहीं था। परिवहन विभाग की उड़नदस्ता टीमों और आरटीओ अधिकारियों ने रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, रायगढ़, जगदलपुर और अंबिकापुर सहित प्रमुख मार्गों पर बसों की जांच की। नेशनल हाईवे-53 पर भी वाहनों की जांच की गई।

अभियान के दौरान बसों में GPS और पैनिक बटन की उपलब्धता के साथ उनकी कार्यशीलता भी जांची गई। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि यात्री बसों में जरूरी सुरक्षा उपकरण सही तरीके से काम करें।

परमिट रद्द होने के बाद सड़क पर मिली बस तो होगी जब्त

परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन बसों के परमिट निरस्त किए गए हैं, वे अब संबंधित परमिट के आधार पर संचालित नहीं हो सकतीं। यदि ऐसी कोई बस सड़क पर चलती हुई पाई जाती है, तो उसे जब्त करने के साथ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अपर परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर के अनुसार, सार्वजनिक परिवहन से जुड़े सभी वाहन मालिकों को सुरक्षा नियमों और परमिट की शर्तों का पालन करना अनिवार्य है। नियमों की अनदेखी करने वाले संचालकों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।

यात्रियों की सुरक्षा के लिए GPS और पैनिक बटन क्यों जरूरी?

बसों में GPS डिवाइस से वाहन की लाइव लोकेशन पर नजर रखी जा सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलती है कि बस निर्धारित रूट और परमिट की शर्तों के अनुसार चल रही है या नहीं।

वहीं, पैनिक बटन आपात स्थिति में यात्रियों के लिए मददगार साबित हो सकता है। इसे दबाने पर संबंधित नियंत्रण व्यवस्था तक सूचना पहुंचाने का प्रावधान है, जिससे जरूरत पड़ने पर सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

परिवहन विभाग की इस कार्रवाई से बस संचालकों को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े नियमों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।