छत्तीसगढ़ में बस का सफर हुआ महंगा! यातायात महासंघ की चेतावनी के बाद सरकार ने बढ़ाया किराया, अब आम यात्रियों की जेब पर पड़ेगा सीधा असर
छत्तीसगढ़ में बस का सफर हुआ महंगा! यातायात महासंघ की चेतावनी के बाद सरकार ने बढ़ाया किराया, अब आम यात्रियों की जेब पर पड़ेगा सीधा असर
रायपुर। छत्तीसगढ़ में यात्री बसों से सफर करने वाले लोगों को अब पहले से ज्यादा किराया चुकाना पड़ेगा। यातायात महासंघ की मांग और आंदोलन की चेतावनी के बाद राज्य सरकार ने यात्री बसों के किराए में बढ़ोतरी कर दी है। परिवहन विभाग ने अलग-अलग श्रेणी की बसों के लिए संशोधित किराया दरें जारी की हैं। इस फैसले का असर रोजाना बस से सफर करने वाले यात्रियों, नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों और ग्रामीण इलाकों से जिला मुख्यालय आने-जाने वाले लोगों पर पड़ सकता है।
दरअसल, छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ लंबे समय से बस किराए में संशोधन की मांग कर रहा था। महासंघ का कहना था कि डीजल की कीमतों और बसों के संचालन पर होने वाले खर्च में लगातार बढ़ोतरी हुई है, जबकि किराया लंबे समय से नहीं बदला गया था। इसी मांग को लेकर संगठन ने नौ सूत्रीय मांगों के साथ प्रदेशव्यापी आंदोलन और बसों का संचालन बंद करने की चेतावनी दी थी। परिवहन मंत्री केदार कश्यप और विभागीय अधिकारियों के साथ हुई बातचीत के बाद किराया बढ़ाने पर सहमति बनी और प्रस्तावित आंदोलन टाल दिया गया।
साधारण बस से एसी स्लीपर तक की नई दरें जारी
परिवहन विभाग की संशोधित किराया तालिका के अनुसार साधारण बसों में शुरुआती पांच किलोमीटर के लिए प्रति यात्री 10 रुपये किराया निर्धारित किया गया है। इसके बाद प्रत्येक किलोमीटर के लिए 1.75 रुपये की दर से किराया देना होगा। वहीं, रात में चलने वाली साधारण बसों में सामान्य किराए से 10 प्रतिशत अधिक राशि ली जाएगी।
सुपर लग्जरी एसी बसों के साथ एसी स्लीपर और सेमी-स्लीपर बसों के लिए शुरुआती पांच किलोमीटर का किराया 12 रुपये तय किया गया है। इसके बाद प्रति किलोमीटर 3.30 रुपये की दर से किराया लगेगा। डीलक्स श्रेणी की रात्रिकालीन बसों के लिए प्रति किलोमीटर 2.20 रुपये की दर निर्धारित की गई है।
नौ सूत्रीय मांगों को लेकर दी गई थी आंदोलन की चेतावनी
छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ ने बस संचालकों की समस्याओं को लेकर सरकार के सामने नौ सूत्रीय मांगें रखी थीं। इनमें यात्री किराए में संशोधन के साथ स्लीपर बसों में सिंगल स्लीपर-सिंगल टैक्स व्यवस्था लागू करने की मांग भी शामिल थी। इसके अलावा ई-बसों के संचालन को शहरी सीमा तक सीमित रखने, ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट वाली बसों के परिचालन पर नियमों के अनुसार नियंत्रण, बसों की समय-सारणी में उचित अंतराल और VLTD डिवाइस के नवीनीकरण शुल्क में राहत देने जैसे मुद्दे उठाए गए थे।
महासंघ ने मैनुअल फिटनेस की सुविधा, ऑनलाइन परमिट व्यवस्था और दूसरे जिलों या राज्यों के लिए परमिट नवीनीकरण की प्रक्रिया आसान बनाने की मांग भी की थी। संगठन का कहना था कि बसों के संचालन से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं होने पर प्रदेशभर में बसों का परिचालन बंद किया जा सकता है।
कांग्रेस ने किराया बढ़ोतरी पर जताया विरोध
बस किराए में बढ़ोतरी को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इस फैसले से पहले से महंगाई की मार झेल रहे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। पार्टी ने किराया वृद्धि को जनविरोधी बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है।
कांग्रेस का तर्क है कि बसें आम जनता के लिए आवागमन का महत्वपूर्ण साधन हैं। मजदूर, किसान, विद्यार्थी और नौकरीपेशा लोग रोजाना आने-जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में किराया बढ़ने से उनके रोजमर्रा के खर्च में इजाफा होगा।
आम यात्रियों के बजट पर पड़ेगा असर
छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में लोग नौकरी, पढ़ाई, इलाज और अन्य जरूरी कामों के लिए बसों से सफर करते हैं। किराए में बढ़ोतरी के बाद नियमित यात्रियों को हर महीने पहले की तुलना में अधिक खर्च करना पड़ सकता है। खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों से शहरों तक आने-जाने वाले लोगों पर इसका असर ज्यादा महसूस हो सकता है।
सरकार और बस संचालकों के बीच हुई सहमति के बाद नई किराया दरें लागू कर दी गई हैं। अब यात्रियों की नजर इस बात पर रहेगी कि बसों में संशोधित किराया सूची स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाती है या नहीं, ताकि उनसे निर्धारित दरों के अनुसार ही किराया लिया जाए।

