Voter List में नाम कट गया तो घबराएं नहीं! पुराने मतदाता भी भर सकते हैं Form-6, चुनाव आयोग ने साफ किया पूरा मामला

Voter List में नाम कट गया तो घबराएं नहीं! पुराने मतदाता भी भर सकते हैं Form-6, चुनाव आयोग ने साफ किया पूरा मामला

Voter List में नाम कट गया तो घबराएं नहीं! पुराने मतदाता भी भर सकते हैं Form-6, चुनाव आयोग ने साफ किया पूरा मामला

रायपुर। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान अगर आपका नाम प्रारूप मतदाता सूची में नहीं है, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। भारत निर्वाचन आयोग ने इस संबंध में बड़ा स्पष्टीकरण जारी कर मतदाताओं की चिंता दूर कर दी है। आयोग ने साफ किया है कि जिन नागरिकों का नाम पहले मतदाता सूची में दर्ज था, लेकिन SIR के बाद प्रकाशित नई प्रारूप सूची में छूट गया है, वे भी दोबारा नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भर सकते हैं। ऐसा करने पर उनके खिलाफ कोई दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।

दरअसल, प्रारूप मतदाता सूची में नाम नहीं मिलने के बाद कई पुराने मतदाता फॉर्म-6 भरने से झिझक रहे थे। उन्हें डर था कि फॉर्म में पहली बार मतदाता सूची में नाम शामिल कराने से जुड़ी घोषणा करने पर उन पर गलत जानकारी देने का आरोप लग सकता है। अब निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि पहले से मतदाता रहे नागरिकों के लिए भी इस स्थिति में फॉर्म-6 भरना पूरी तरह नियमानुसार है।

पुराने मतदाता भी भर सकते हैं फॉर्म-6

निर्वाचन आयोग के संज्ञान में आया था कि SIR के दौरान कई ऐसे लोगों के नाम प्रारूप मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए, जो पहले से मतदाता के रूप में पंजीकृत थे। ऐसे नागरिकों को फॉर्म-6 भरने को लेकर भ्रम था। इसकी मुख्य वजह फॉर्म में दी गई घोषणा थी, जिसमें पहली बार मतदाता सूची में नाम शामिल कराने की बात कही जाती है।

लोगों को आशंका थी कि पहले से मतदाता होने के बावजूद इस घोषणा के साथ आवेदन करने पर उनके खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कार्रवाई हो सकती है। आयोग ने इस आशंका को दूर करते हुए कहा है कि यदि किसी नागरिक का नाम वर्तमान प्रारूप मतदाता सूची में नहीं है, तो वह अंतिम मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए नए सिरे से फॉर्म-6 जमा कर सकता है।

आयोग के मुताबिक, पहले मतदाता सूची में नाम दर्ज होने के बावजूद फॉर्म-6 भरना गलत या झूठी घोषणा नहीं माना जाएगा। इसलिए पुराने मतदाताओं को किसी तरह के कानूनी डर के बिना अपना आवेदन करना चाहिए।

दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला

निर्वाचन आयोग ने अपने स्पष्टीकरण में दिल्ली हाईकोर्ट के 14 अक्टूबर 2026 के फैसले का भी हवाला दिया है। याचिका संख्या W.P. (C) No. 14955/2026, निलोत्पल दत्ता एवं अन्य बनाम भारत निर्वाचन आयोग एवं अन्य मामले में अदालत ने भी इस स्थिति को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट किया था।

अदालत के फैसले के अनुसार, ऐसी परिस्थिति में गलत घोषणा को लेकर मतदाताओं की आशंका निराधार है और संबंधित आवेदक नियमानुसार फॉर्म-6 जमा कर सकते हैं। आयोग ने इसी आधार पर पुराने मतदाताओं को आवेदन करने में किसी तरह की झिझक नहीं रखने की बात कही है।

ERO को दिए गए कार्रवाई नहीं करने के निर्देश

भारत निर्वाचन आयोग ने सभी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) को भी इस संबंध में जरूरी निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि केवल इस आधार पर किसी आवेदक के खिलाफ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 के तहत कार्रवाई नहीं की जाए कि उसका नाम पहले की मतदाता सूची में दर्ज था।

हालांकि, आवेदन करते समय कुछ जरूरी शर्तों का ध्यान रखना होगा। आवेदक को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसका नाम किसी अन्य संसदीय या विधानसभा क्षेत्र की वर्तमान मतदाता सूची में पहले से दर्ज न हो। इसके अलावा फॉर्म-6 निर्धारित कानूनी नियमों और प्रक्रिया के अनुसार ही जमा करना होगा।

छत्तीसगढ़ के मतदाताओं से नाम जांचने की अपील

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, छत्तीसगढ़ ने प्रदेश के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत प्रकाशित प्रारूप मतदाता सूची में अपना नाम जरूर जांच लें। अगर सूची में नाम नहीं मिलता है, तो बिना किसी डर या संकोच के समय रहते फॉर्म-6 भरकर अपना पंजीकरण सुनिश्चित कराएं।

निर्वाचन आयोग के इस स्पष्टीकरण से उन लोगों को राहत मिली है, जो पहले मतदाता होने के बावजूद नई सूची में नाम नहीं मिलने के कारण असमंजस में थे। अब ऐसे नागरिक नियमानुसार आवेदन कर सकते हैं और अंतिम मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।