Diwali 2026: दुनिया के इन देशों में पटाखे फोड़ने पर है सख्त पाबंदी, पकड़े गए तो हो सकती है जेल और भारी जुर्माना, जानिए क्यों लिया गया बड़ा फैसला
Diwali 2026: दुनिया के इन देशों में पटाखे फोड़ने पर है सख्त पाबंदी, पकड़े गए तो हो सकती है जेल और भारी जुर्माना, जानिए क्यों लिया गया बड़ा फैसला
नई दिल्ली। दिवाली का त्योहार आते ही बाजारों में रौनक बढ़ जाती है। घरों की सजावट से लेकर मिठाइयों और आतिशबाजी तक, हर तरफ उत्सव का माहौल दिखाई देता है। भारत में दिवाली के मौके पर पटाखे फोड़ना लंबे समय से उत्सव का हिस्सा रहा है। हालांकि, बढ़ते वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के चलते अब देश के कई हिस्सों में पटाखों के इस्तेमाल को लेकर सख्ती की जा रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में ऐसे भी कई देश हैं, जहां आम लोगों के लिए पटाखे खरीदना और जलाना पूरी तरह प्रतिबंधित है?
दुनिया के कई देशों ने पटाखों से होने वाले धुएं, तेज आवाज, आग लगने की घटनाओं और पशु-पक्षियों को होने वाले नुकसान को देखते हुए कड़े नियम बनाए हैं। कुछ देशों में आम जनता को आतिशबाजी करने की अनुमति नहीं है, जबकि कुछ जगह केवल सरकारी अनुमति और लाइसेंस प्राप्त पेशेवरों को ही आतिशबाजी का प्रदर्शन करने की छूट मिलती है। आइए जानते हैं कि किन देशों में पटाखों पर सख्ती है और इसके पीछे क्या कारण हैं।
कनाडा में आतिशबाजी को लेकर बेहद सख्त नियम
कनाडा में आतिशबाजी के इस्तेमाल को लेकर कई तरह के नियम लागू हैं। यहां पटाखों की खरीद, बिक्री, भंडारण, परिवहन और इस्तेमाल पर संघीय तथा स्थानीय स्तर पर नियंत्रण रखा जाता है। कुछ प्रकार की आतिशबाजी केवल विशेष अनुमति के साथ ही इस्तेमाल की जा सकती है। वहीं, कई शहरों में आम लोगों के लिए पटाखे जलाने पर स्थानीय प्रतिबंध भी लागू हैं।
इन नियमों का मुख्य उद्देश्य पटाखों से होने वाली दुर्घटनाओं, आग और प्रदूषण को रोकना है। हालांकि, कनाडा में सभी उपभोक्ता आतिशबाजी पर एक समान देशव्यापी प्रतिबंध नहीं है, बल्कि नियम पटाखों की श्रेणी और स्थानीय प्रशासन के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
आयरलैंड में आम लोगों के लिए पटाखे चलाना मुश्किल
आयरलैंड में आतिशबाजी को लेकर बेहद सख्त व्यवस्था है। यहां आम लोगों के लिए अधिकांश आतिशबाजी प्रतिबंधित है और बिना अनुमति पटाखे रखना या उनका इस्तेमाल करना कानूनी परेशानी में डाल सकता है। आमतौर पर केवल लाइसेंस प्राप्त आयोजकों और पेशेवरों को निर्धारित नियमों के तहत आतिशबाजी के प्रदर्शन की अनुमति मिलती है।
सरकार की इस सख्ती के पीछे लोगों की सुरक्षा और पटाखों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकना प्रमुख वजह है। तेज धमाकों और अनियंत्रित आतिशबाजी से होने वाली चोटों को कम करने के लिए यहां कड़े नियम बनाए गए हैं।
ऑस्ट्रेलिया में आम लोग नहीं खरीद सकते पटाखे
ऑस्ट्रेलिया में भी आम नागरिकों के लिए आतिशबाजी खरीदने और इस्तेमाल करने पर सख्त नियंत्रण है। यहां पटाखों का प्रदर्शन आमतौर पर लाइसेंस प्राप्त पेशेवरों द्वारा ही किया जाता है। इसके लिए संबंधित अधिकारियों से पहले अनुमति लेना जरूरी होता है।
हालांकि, कुछ क्षेत्रों में विशेष नियमों और अपवादों के तहत सीमित छूट मिल सकती है, लेकिन आम लोगों के लिए मनमाने तरीके से पटाखे फोड़ना कानूनी रूप से प्रतिबंधित है। इन नियमों का मकसद आग लगने की घटनाओं, चोट और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करना है।
चीन में भी कई बड़े शहरों ने लगाया प्रतिबंध
चीन को पटाखों और आतिशबाजी की परंपरा का जन्मस्थान माना जाता है। इसके बावजूद वहां के कई बड़े शहरों में पटाखों के इस्तेमाल पर सख्ती की गई है। बीजिंग और शंघाई जैसे शहरों में सुरक्षा और प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए आतिशबाजी पर प्रतिबंध या कड़े नियंत्रण लागू किए गए हैं।
चीन में पटाखों से निकलने वाला धुआं, आग लगने का खतरा और वायु गुणवत्ता में गिरावट बड़ी चिंता का विषय है। इसी वजह से कई शहरों में सार्वजनिक स्थानों और संवेदनशील इलाकों में आतिशबाजी पर रोक लगाई गई है। हालांकि, चीन में नियम हर शहर और क्षेत्र के हिसाब से अलग-अलग हैं।
ब्रिटेन में रात 11 बजे के बाद पटाखे फोड़ना पड़ सकता है भारी
ब्रिटेन में पटाखों पर पूरी तरह देशव्यापी प्रतिबंध नहीं है, लेकिन इनके इस्तेमाल को लेकर समय और स्थान निर्धारित किए गए हैं। सामान्य नियमों के मुताबिक रात 11 बजे से सुबह 7 बजे तक आतिशबाजी करना प्रतिबंधित है। कुछ विशेष मौकों पर इसमें सीमित छूट दी जाती है।
इसके अलावा सड़क और सार्वजनिक स्थानों पर पटाखे चलाने को लेकर भी सख्त नियम हैं। नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई हो सकती है। ब्रिटेन में इन प्रतिबंधों का उद्देश्य रात के समय लोगों की शांति बनाए रखना और पटाखों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकना है।
नेपाल में भी पटाखों की खरीद-बिक्री पर सख्ती
भारत के पड़ोसी देश नेपाल में भी दिवाली और अन्य त्योहारों के दौरान पटाखों को लेकर प्रशासन सख्त रहता है। प्रदूषण और सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पटाखों की खरीद-बिक्री और इस्तेमाल पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जाती है। खासतौर पर त्योहारी सीजन में पुलिस और प्रशासन अवैध रूप से पटाखे बेचने वालों के खिलाफ अभियान चलाते हैं।
नेपाल में आतिशबाजी पर सख्ती की प्रमुख वजह आग लगने की घटनाओं, चोट और पर्यावरण को होने वाले नुकसान से लोगों को बचाना है।
आखिर सरकारें पटाखों पर प्रतिबंध क्यों लगाती हैं?
पटाखों पर प्रतिबंध लगाने के पीछे सबसे बड़ी वजह वायु प्रदूषण है। आतिशबाजी के दौरान हवा में सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और कई तरह के सूक्ष्म कण फैलते हैं। इनमें पीएम 2.5 जैसे बेहद छोटे प्रदूषक कण भी शामिल होते हैं, जो सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं।
पटाखों का धुआं खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से परेशान लोगों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे खांसी, सांस लेने में परेशानी और अस्थमा जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। अधिक प्रदूषण के कारण दिल और फेफड़ों से जुड़ी परेशानियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
आग और दुर्घटनाएं भी हैं बड़ी वजह
पटाखों के कारण हर साल कई जगह आग लगने और लोगों के घायल होने की घटनाएं सामने आती हैं। लापरवाही से पटाखे जलाने पर घरों, दुकानों, वाहनों और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंच सकता है। कई बार बच्चों और युवाओं के हाथ, आंख और चेहरे तक गंभीर रूप से झुलस जाते हैं।
इसी खतरे को देखते हुए कई देशों ने आम लोगों के लिए आतिशबाजी पर प्रतिबंध लगाया है और केवल प्रशिक्षित पेशेवरों को ही इसकी अनुमति दी है। सरकारों का मानना है कि नियंत्रित तरीके से आतिशबाजी करने पर दुर्घटनाओं की आशंका कम की जा सकती है।
पटाखों की आवाज से पशु-पक्षियों पर भी पड़ता है असर
आतिशबाजी का नुकसान केवल इंसानों तक सीमित नहीं रहता। तेज धमाकों और अचानक होने वाली आवाजों से पालतू जानवर और वन्यजीव भी बुरी तरह प्रभावित होते हैं। कुत्ते और बिल्लियां डरकर छिपने लगते हैं, जबकि पक्षियों में घबराहट और तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है। कई बार तेज आवाज के कारण पक्षी अपने घोंसलों से उड़ जाते हैं और घायल भी हो सकते हैं।
यही वजह है कि कई देशों में पटाखों के इस्तेमाल को सीमित करने के साथ-साथ शोर नियंत्रण के नियम भी लागू किए गए हैं।
उत्सव और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने की कोशिश
दुनिया के अलग-अलग देशों में पटाखों को लेकर नियम भले ही अलग हों, लेकिन इनके पीछे मुख्य उद्देश्य लोगों की सुरक्षा, बेहतर वायु गुणवत्ता और पर्यावरण की रक्षा करना है। कहीं आम लोगों के लिए पटाखों पर सख्त रोक है तो कहीं लाइसेंस प्राप्त पेशेवरों को नियंत्रित आतिशबाजी की अनुमति दी जाती है।
कनाडा, आयरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, चीन, ब्रिटेन और नेपाल के उदाहरण बताते हैं कि त्योहारों की खुशियों के साथ लोगों की सेहत और सुरक्षा को भी प्राथमिकता देना जरूरी है।

